Description
"मनुष्य का जीवन तभी सफल होता है जब उसमें भक्ति का भाव जागृत होता है। भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम, विश्वास और समर्पण में है।
भक्ति हमें विनम्र बनाती है, अहंकार को दूर करती है और हृदय को पवित्र करती है। जब हम भक्ति के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन की कठिनाइयाँ भी सहज लगने लगती हैं क्योंकि हमें विश्वास होता है कि प्रभु सदैव हमारे साथ हैं।
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